मंगलवार, 18 जुलाई 2017

गुफ्तगू के इलाहाबाद विशेषांक में


3. संपादकीय: इलाहाबाद विशेषांक और ‘गुफ्तगू’
4-5. आपकी बात
6-10. धरोहर: महादेवी वर्मा
11-24. आज़ादी से पहले इलाहाबाद: प्रो. सैयद अक़ील रिज़वी
25-29. अकबर के यहां मुकम्मल नज़रिया: शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी
30-31. बच्चन, निराला और महादेवी वर्मा का इलाहाबाद: मुकुटधारी अग्रवाल
32-40. इलाहाबाद की उर्दू तहज़ीब व तख़्लीक़: प्रो. अली अहमद फ़ातमी
41-43. लोग अपनी प्यास बुझाते हैं चले जाते हैं: मुनव्वर राना
44-50. कैलाश गौतम: जमात से बाहर का कवि: दूधनाथ सिंह
51-58. प्रयाग की विरासत के स्मारक ; डाॅ. मीनू अग्रवाल
59-61. अच्छा दोस्त और मोहसिन नय्यर आक़िल: अख़्तर अज़ीज़
62-63. फ़िराक़ गोरखपुरी के साथ एक सुब्ह: प्रो. अली अहमद फ़ातमी
64-65. इलाहाबाद और रंगमंच की परंपरा: अजीत पुष्कल
66-68. ग़ालिब फ़कीराबाद में नासाज हो गया: अजय राय
69-73. इतिहास के आईन में इलाहाबाद: कृष्ण कुमार यादव
74-79. हिन्दी आलोचना और इलाहाबाद: रविनंदन सिंह
80. महान महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं अमजदी बानो: मोहम्मद वज़ीर अंसारी
81-82. धर्मयुग को स्थापित करके दम लिया: संगीत सिंह ‘भावना’
83-85. डाॅ. ज़मीर अहसन-यादों के दरीचों से: अतिया नूर
86-87. और बंद हो गईं उर्दू की पत्र-पत्रिकाएं: इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
88-89. सिर्फ़ कवयित्री नहीं हैं महादेवी वर्मा: शाज़ली ख़ान
90-91. हिन्दी प्रसार का प्रमुख केंद्र साहित्य सम्मेलन: इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
92-95. एक अज़ीम शख़्सियत नीलाभ जी अश्क: भूमिका द्विवेदी
96-98. इलाहाबाद विश्वविद्यालय की है अपनी पहचान: अंजली केसरवानी
99-101. हालावाद के पुरोधा हरिवंश राय बच्चन: प्रिया श्रीवास्तव
102-103. तहज़ीब और लियाकत का शहर: ज्योतिर्मयी
104-105. निराला के बाल साहित्य का शैक्षिक अवदान: डाॅ. नितिन सेठी
106. 9 एलगिन रोड: नीरजा मेहता
107. चंद्रशेखर आज़ाद का खून लगा पीपल का पत्ता: केदारनाथ सविता
108-109. हास्य का उपहार लुटाते उपाध्याय जी: नरेश मिश्र
110. हिन्दी साहित्य में प्रयाग: डाॅ. विनय कुमार श्रीवास्तव
111. कल्पवास: शिवानी मिश्रा
112-114. इंटरव्यू: काॅमरेड ज़ियाउल हक़
115. चैपाल: हिन्दी उर्दू साहित्य में इलाहाबाद का योगदान
116. गुलशन-ए-इलाहाबाद- नरेश मिश्र
117-125. ग़ज़लें: दिल उन्नावी, सागर होशियारपुरी, डाॅ. असलम इलाहाबादी, बुद्धिसेन शर्मा, एमए क़दीर, वजीहा खुर्शीद, तलब जौनपुरी, रमोला रूथ लाल, शकील ग़ाज़ीपुरी, अख़्तर अज़ीज़, फ़रमूद इलाहाबादी, डाॅ. नईम साहिल, अजीत शर्मा आकाश, सुनील दानिश, वाक़िफ़ अंसारी, इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, भारत भूषण जोशी, शाहिद सफ़र, शिबली सना, शादमा ज़ैदी शाद, डाॅ. हसीन ज़िलानी, ज़फ़र सईद जिलानी, डाॅ. राम आशीष यादव, संजू शब्दिता, अमित वागर्थ, रुस्तम इलाहाबादी, राजेश राज जौनपुरी, सगीर अहमद सिद्दीक़ी, रजनीश प्रीतम, अहमद सिद्दीक़ी इलाहाबादी, सोमनाथ शुक्ला, अरुण सरकारी, महक जौनपुरी
126. क़त्आत: जावेद शोहरत
127-128. नरेश महरानी के दोहे
129-132. डाॅ. अशरफ़ अली बेग के सौ शेर
133-147. कविताएं: यश मालवीय, संजय पुरुषार्थी, शैलेंद्र जय, श्लेष गौतम, प्रभाशंकर शर्मा, वसुंधरा पांडेय, अंजली मालवीय मौसम, अमरनाथ उपाध्याय, डाॅ. शिल्पी श्रीवास्तव, लोकेश श्रीवास्तव, तनु श्रीवास्तव, ललित पाठक नारायणी, रुचि श्रीवास्तव, पुष्पलता शर्मा, उर्वशी उपाध्याय, अनिल मानव, पीयूष मिश्र, ईश्वरशरण शुक्ल, शालिनी साहू, नंदल हितैषी, वेदांत विप्लव, रामचंद्र शुक्ल, डाॅ. महेश मनमीत, जयचंद्र प्रजापति ‘कक्कू’, अदिति मिश्रा, मोनिका मेहरोत्रा, अलका श्रीवास्तव
148-159. अदबी ख़बरें
150-174. परिशिष्ट: देवेंद्र प्रताप वर्मा ‘विनीत’
175-208. परिशिष्ट: मनमोहन सिंह ‘तन्हा’

2 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (20-07-2017) को ''क्या शब्द खो रहे अपनी धार'' (चर्चा अंक 2672) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ajeet Sharma Aakash ने कहा…

इलाहाबाद को अपने आप में सँजोए एक संग्रहणीय अंक !!!

एक टिप्पणी भेजें